Category Archives: Language and Literature

कितना आवश्यक है हिन्दी में अंग्रेजी शब्दों का बढता प्रयोग ?

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स्रोत : http://kiranbatni.com

हिन्दी दैनिक जनसत्ता में प्रकाशित एक पत्र में अभिषेक त्रिपाठी ने कुछ विद्वानों के इस प्रस्ताव पर टिप्पणी की है कि यदि हिन्दी भाषा में अंग्रेजी आदि भाषाओं से शब्द मिला लिए जाएँ, तो इसे अधिक समृद्ध बनाया जा सकता है । Continue reading

ये क्या देखता हूँ

रचनाकार — प्रदीप बहुगुणा ‘दर्पण’

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ये क्या देखता हूँ

किसी बुरी शै का असर देखता हूं ।
जिधर देखता हूं जहर देखता हूं ।।

रोशनी तो खो गई अंधेरों में जाकर ।
अंधेरा ही शामो सहर देखता हूं ।। Continue reading

क्यों आग बुझा नहीं देते

रचनाकार – ऋतेश मिश्रा 

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                    क्यों आग बुझा नहीं देते

                    क्यों आग बुझा नहीं देते?
                    नफरत से प्रचंड कर, विसंगति से विपुल कर
                    क्यों चिनगारियों को मशालों मॆं धधका देते?
                    क्यों आग बुझा नहीं देते? Continue reading

ख्वाइशें कुछ ऐसी

रचनाकार – हेमा जोशी

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photo credit: hehaden Faded glory, fading light via photopin (license)

ख्वाइशें कुछ ऐसी

ख्वाइशें कुछ ऐसी, नन्हे जुगनू जैसी
अंधेरे में उस उजाले की तरह, जिसे उंगलियाँ छूना चाहती हैं
हैं अनगिनत तारों की तरह,
जिन्हें मैं हर रात निहारती हूँ, बातें करती हूँ
और छू लेना चाहती हूँ
हैं प्यारी, अनगिनत ओस की बूंदों की तरह
ये ख्वाइशें कुछ ऐसी,
जो उड़ जाना चाहती हैं पंख लगाकर Continue reading

My Favourite Stories From Contemporary Bengali Literature : The Lone Tree

28317470829_8e99126b55_nI moved to this new accommodation in January this year. The design and construction of this residential complex is quite strange. None of the residents seems to have any clue about what came to the architect’s mind to have designed such a stupid tower. No ventilation, no windows, no outside view. Everything is closed with glass panes, shutters, walls. We don’t even know what colour the sky is at any time of the day or whether it is raining outside or is it sunny. Continue reading

इंद्रासन प्राप्त करो तुम

रचनाकार – गौरव मिश्र

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photo credit: Miradortigre Aoraki via photopin (license)

इंद्रासन प्राप्त करो तुम

अस्थिर अशांत इस जग में
क्यों मूक बना सोता है,
यह रत्नविभूषित जीवन

क्यों इसे व्यर्थ खोता है ?

तू नहीं जानता पागल
यह समय कभी नहीं रुकता,
यह काल अमिट अविनाशी

पद चिह्न छोडता चलता । Continue reading

Book Review: And So Can You By Dr. Roopleen

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I have received the book And So Can You by Dr. Roopleen for review. The secondary title of the book suggests that this is a  book that every doctor and medical student must read. This creates an impression that it is a self-help book which young doctors or students of medicine would like to refer again and again for guidance and inspiration. I can visualize such a book lying comfortably on my book shelf or my desk so that I can reach out to it any time I want or need it. Continue reading