Tag Archives: Humour

हम सब भारतवासी भाई-बहन हैं !

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photo credit: Beegee49 Happy Children via photopin (license)

मुझे अपनी मित्रमण्डली में चल रही एक विशेष विषय पर बातचीत याद आ रही है । आप तो जानते ही हैं, विवाहित मित्रों की एक ही तो समस्या होती है — अपने अविवाहित रह गए मित्रों का विवाह । और मेरी समस्या थी कि जब भी मैं किसी कन्या को पसंद आता, वह झट-से मुझे अपना भाई बना लेती — ‘तुम्हारी शक्ल मेरे भाई से मिलती है’ । फिर जैसे हिन्दू लोग मूर्ति को ईश्वर मानकर उसकी पूजा करते हैं, उसी प्रकार मुझे अपने भाई का प्रतीक मानकर राखी आदि बाँधने लगतीं । और हम न इधर के रहे न उधर के — असली भाई तो थे ही नहीं, और संबंधी भी बन नहीं पाए । जब असली भाई आ गया, तो हमें सुरेश वाडकर का गाना सुनने के लिए छोड दिया गया — साँझ ढले गगन तले हम कितने एकाकी . . . । Continue reading
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Winter wisdom!

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Here comes winter!

Photo Sources:

Vikram: Filmibeat.com; Ranveer Singh: Indian Express; Akshay Kumar: Financial Express; Mammootty: Filmibeat.com; Suniel Shetty: Hindustan Times; Jr NTR: Filmibeat.com; Nivin Pauly: Filmibeat.com; Ram Charan: mirchi9.com.

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जो गरजते हैं वो बरसते नहीं

4380042754_54ae574115_nयदि किसी से “जो गरजते हैं वो बरसते नहीं” का अर्थ उदाहरण देकर समझाने के लिए कहा जाए, तो मेरे विचार से अधिकांश लोग वेंकटेश प्रसाद और आमिर सुहेल के द्वन्द्व का वर्णन करेंगे । घटना है बीस साल पहले 15 मार्च 1996 की । कितनी आश्चर्यजनक बात है न, कि सभी ऐतिहासिक घटनाएँ हमारी स्मृति के रसातल से 20 साल बाद ही सतह पर आती हैं । ओ हेनरी की इसी शीर्षक की एक कहानी है, और विश्वजीत-अभिनीत एक हिन्दी फिल्म भी है । बहरहाल, हम बात कर रहे हैं 1996 की । Continue reading