Tag Archives: Poetry

ये क्या देखता हूँ

रचनाकार — प्रदीप बहुगुणा ‘दर्पण’

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ये क्या देखता हूँ

किसी बुरी शै का असर देखता हूं ।
जिधर देखता हूं जहर देखता हूं ।।

रोशनी तो खो गई अंधेरों में जाकर ।
अंधेरा ही शामो सहर देखता हूं ।। Continue reading

क्यों आग बुझा नहीं देते

रचनाकार – ऋतेश मिश्रा 

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                    क्यों आग बुझा नहीं देते

                    क्यों आग बुझा नहीं देते?
                    नफरत से प्रचंड कर, विसंगति से विपुल कर
                    क्यों चिनगारियों को मशालों मॆं धधका देते?
                    क्यों आग बुझा नहीं देते? Continue reading

ख्वाइशें कुछ ऐसी

रचनाकार – हेमा जोशी

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photo credit: hehaden Faded glory, fading light via photopin (license)

ख्वाइशें कुछ ऐसी

ख्वाइशें कुछ ऐसी, नन्हे जुगनू जैसी
अंधेरे में उस उजाले की तरह, जिसे उंगलियाँ छूना चाहती हैं
हैं अनगिनत तारों की तरह,
जिन्हें मैं हर रात निहारती हूँ, बातें करती हूँ
और छू लेना चाहती हूँ
हैं प्यारी, अनगिनत ओस की बूंदों की तरह
ये ख्वाइशें कुछ ऐसी,
जो उड़ जाना चाहती हैं पंख लगाकर Continue reading

इंद्रासन प्राप्त करो तुम

रचनाकार – गौरव मिश्र

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photo credit: Miradortigre Aoraki via photopin (license)

इंद्रासन प्राप्त करो तुम

अस्थिर अशांत इस जग में
क्यों मूक बना सोता है,
यह रत्नविभूषित जीवन

क्यों इसे व्यर्थ खोता है ?

तू नहीं जानता पागल
यह समय कभी नहीं रुकता,
यह काल अमिट अविनाशी

पद चिह्न छोडता चलता । Continue reading

My Rhyme Crime

Guest article by Geet George

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To start this confession, I spent hours trying to come up with a good statement which would be able to help me describe poetry in its complete essence. Unfortunately, words were not of much help to me here. Only the experience of reading a well written poetry and the emotions it stirs up in you can convey what I wish to say.

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