Daily Archives: August 27, 2018

ये क्या देखता हूँ

रचनाकार — प्रदीप बहुगुणा ‘दर्पण’

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ये क्या देखता हूँ

किसी बुरी शै का असर देखता हूं ।
जिधर देखता हूं जहर देखता हूं ।।

रोशनी तो खो गई अंधेरों में जाकर ।
अंधेरा ही शामो सहर देखता हूं ।। Continue reading