Daily Archives: January 5, 2016

अभिनन्दन

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लीजिए हम आ गए। आपको बहुत प्रतीक्षा करनी पडी, इसके लिए मुझे खेद है।

आपका हिन्दी के प्रति आकर्षण एवं प्रेम स्तुति-योग्य है। आपने जो मुझे उक्त भाषा में लिखने के लिए उत्साहित तथा प्रेरित किया है, उसके लिए भी मैं स्वयं को कृतज्ञ अनुभव करता हूँ। किन्तु एक सामान्य व्यक्ति के रूप में मेरी भी कुछ सीमाएँ हैं। अपने प्रदत्त कार्य की अवहेलना करके मैं यदि साहित्य रचना कार्य में समय निवेश करूँ, तो शायद इसका अनुमोदन आप भी नहीं करेंगे। इसके विपरीत, सभी सांसारिक कार्यकलापों तथा दायित्वों को तिलांजलि देकर, एक प्रकार से संन्यास ही लेकर, सरस्वती-आराधना में मनोनिवेश करने के लिए अत्यधिक परिपक्वता की आवश्यकता है, जिसका दावा मैं नहीं कर सकता।   Continue reading